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ब्राह्मण ब्राह्मण ब्राह्मण
ब्राह्मण
ब्राह्मण समाज की अगर बात करें तो ब्राह्मण समाज दुनिया के सबसे पुराने संप्रदाय एवं जाति में से एक है। पुराने वेदो एवं उपनिषदों के अनुसार “ब्राह्मण समाज का इतिहास”, सृष्टि के रचयिता “ब्रह्मा” से जुड़ा हुआ है। वेदों के अनुसार ऐसा बताया जाता है कि “ब्राह्मणों की उत्पत्ति” हिंदू धर्म के देवता “ब्रह्मा” से हुई थी। ऐसा माना जाता है कि वर्तमान समय में जितने भी ब्राह्मण समाज के लोग हैं वे सब भगवान ब्रह्मा के वंशज हैं।
ब्राह्मण
ब्राह्मण निर्धारण (ब्राह्मण कौन है?) प्राचीन समय से ब्राह्मणों का निर्धारण माता पिता की जाति के आधार पर होने लगा है, लेकिन स्कंदपुराण के अनुसार ‘ब्राह्मण’ जाति नहीं है। स्कंद पुराण में आध्यात्मिक दृष्टि से बताया गया है कि जो व्यक्ति ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के पश्चात भी ब्राह्मण वाले कर्मकांड ना करें या फिर मदिरा एवं मांस का सेवन करें तो वह व्यक्ति एक शूद्र के समान है, ऐसे व्यक्ति को ब्राह्मण का दर्जा देने का कोई अधिकार नहीं है।
ब्राह्मण
ब्राह्मण जाति के लोग मुख्यत उत्तर और मध्य भारत के ज्यादातर पठार इलाकों में पाए जाते हैं, इसके अलावा ब्राह्मणों की कुछ संख्या पूरे भारत में पाई जाती है। ब्राह्मणों की वर्तमान स्थिति बेहतर है, इस जाति के लोग अपनी जीविका चलाने के लिए व्यवसाय, नौकरी, खेती, ज्योतिष शास्त्र आदि पर निर्भर होते हैं। इसके अलावा ब्राह्मण जाति से कई बड़ी हस्तियां हैं जो बॉलीवुड, क्रिकेट अन्य क्रिएटिव फील्ड एवं खेल जगत आदि में आसीन है।

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ब्राह्मण को क्या नहीं करना चाहिए / ब्राह्मण के नियम

ब्राह्मणों को हमेशा सात्विक और शाकाहारी भोजन ही करना चाहिए. ब्राह्मणों को हमेशा भोजन करते समय मौन धारण करके भोजन करना चाहिए. अगर भोजन के दौरान कुछ कार्य हैं. तो उसे इशारे से बताना चाहिए. ब्राह्मण को कभी भी भोजन में कमियां नहीं निकालनी चाहिए. क्योंकि ऐसा करने से अन्नदेवता का अपमान होता हैं. इसलिए जो भी भोजन मिले ख़ुशी-ख़ुशी खा लेना चाहिए. ब्राह्मणों को हो सके तो पत्तल या पित्तल के बर्तन में भोजन करना चाहिए. काफी ब्राह्मण श्राद्ध पक्ष में पितरों की पूजा करवाने के लिए जाते हैं. वहां ब्राह्मणों को भोजन करवाया जाता हैं. कुछ मान्यता के अनुसार ब्राह्मणों को श्राद्ध का भोजन सिर्फ तीन बार ही करना चाहिए. इससे अधिक बार भोजन नहीं करना चाहिए.

ब्राह्मण की उत्पत्ति कहां से हुई

ब्राह्मणों का सीधा संबंध ब्रह्माजी से हैं. ऐसा माना जाता है की हिंदू सनातन धर्म के देवता ब्रह्माजी ने ब्राह्मणों की उत्पति की थी. वर्तमान के सभी ब्राह्मण ब्रह्माजी के वंशज माने जाते हैं. राज परिवार में ब्राह्मणों को इज्जत और शोहरत दी जाती थी. कुछ इतिहासकारों का मानना है की पहले के समय में राजा के दरबार में राजगुरु हुआ करते थे. जो की ब्राह्मण होते थे. ऐसा माना जाता है की इन राजगुरु के कहे अनुसार ही राजा सभी कार्य करते थे. अर्थात किसी भी कार्य को करने से पहले राजगुरु (ब्राह्मण) की सलाह ली जाती थी. प्राचीनकाल के ब्राह्मण संगीत, कला, संस्कृति, विज्ञान, राजनीति, साहित्य सभी क्षेत्र में पारंगत हुआ करते थे. इसलिए राजा भी इनकी सुनते थे. और इनकी राय लेते थे.

ब्रह्मा के पुत्र

विष्वकर्मा, अधर्म, अलक्ष्मी, आठवसु, चार कुमार, 14 मनु, 11 रुद्र, पुलस्य, पुलह, अत्रि, क्रतु, अरणि, अंगिरा, रुचि, भृगु, दक्ष, कर्दम, पंचशिखा, वोढु, नारद, मरिचि, अपान्तरतमा, वशिष्‍ट, प्रचेता, हंस, यति आदि मिलाकर कुल 59 पुत्र थे ब्रह्मा के। ब्रह्मा के प्रमुख पुत्र : 1.मन से मारिचि। 2.नेत्र से अत्रि। 3.मुख से अंगिरस। 4.कान से पुलस्त्य। 5.नाभि से पुलह। 6.हाथ से कृतु। 7.त्वचा से भृगु। 8.प्राण से वशिष्ठ। 9.अंगुष्ठ से दक्ष। 10.छाया से कंदर्भ। 11.गोद से नारद। 12.इच्छा से सनक, सनन्दन, सनातन और सनतकुमार। 13.शरीर से स्वायंभुव मनु और शतरुपा। 14.ध्यान से चित्रगुप्त।

कश्यप ऋषि

कश्यप ऋषि एक वैदिक ऋषि थे। इनकी गणना सप्तर्षि गणों में की जाती थी। इनके वंशज ही सृष्टि के प्रसार में सहायक हुए। इनके पिता ब्रह्मा के पुत्र मरीचि ऋषि थे। इन्हें परमपिता ब्रह्मा का अवतार माना गया है। द्वापर युग में कश्यप प्रजापति ही भगवान विष्णु के कृष्णावतार में उनके पिता वसुदेव थे तथा उनकी प्रथम पत्नी अदिति देवकी और उनकी द्वितीय पत्नी दिति रोहिणी थीं। ब्रह्मा के सात मानस पुत्रों में से एक 'मरीचि' थे जिसने कश्यप ऋषि उत्पन्न हुए। कश्यप ने दक्ष प्रजापति की १७ पुत्रियों से विवाह किया। दक्ष की इन पुत्रियों से जो सन्तान उत्पन्न हुई अदिति, दिति, दनु, अनिष्ठा, काष्ठा, सुरसा, इला,, मुनि,सुरभि,कद्रू,विनता,यामिनी, ताम्रा, तिमि, क्रोधवशा, सरमा, पातंगी, मार्कण्डेय पुराण और भागवत पुराण के अनुसार तेरह पत्नियां महाभारत और विष्णु पुराण के अनुसार कश्यप की सत्रह पत्नियां थीं जबकि भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण के अनुसार कश्यप की तेरह पत्नियां थीं और मत्स्य पुराण के अनुसार नौ। एक परम्परा के अनुसार देवता, दैत्य, दानव, यक्ष, गंधर्व, रक्षा, नाग इन सभी जीवधारियों की उत्पत्ति कश्यप से हुई।

ब्राह्मण समाज का इतिहास, ब्राह्मणों की उत्पति कैसे हुई ?

इतिहास ब्राह्मण समाज का इतिहास भारत के वैदिक धर्म से आरम्भ होता है। वास्तव में ब्राह्मण कोई जाति विशेष ना होकर एक वर्ण है, दक्षिण भारत में द्रविड़ ब्राह्मण को ही कहा जाता है| भारत का मुख्य आधार ही ब्राह्मणों से शुरू होता है। ब्राह्मण नरम व्यवहार के होते हैं| ब्राह्मण व्यवहार का मुख्य स्रोत वेद हैं।

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वेद

पुराण

अठारह पुराण बताये गये हैं। १. ब्रह्मपुराण, २. पद्मपुराण, ३. विष्णुपुराण, ४. शिवपुराण, ५. भागवतपुराण, ६. भविष्यपुराण, ७. नारदपुराण, ८. मार्कण्डेयपुराण, ९. अग्निपुराण, १०. ब्रह्मवैवर्तपुराण, ११. लिंगपुराण, १२. वाराहपुराण, १३. स्कन्दपुराण, १४. वामनपुराण, १५. कृर्मपुराण, १६. मत्स्यपुराण, १७. गरुडपुराण और १८. ब्रह्माण्डपुराण[4]

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कश्यपोऽत्रिर्वसिष्ठश्च विश्वामित्रोऽथ गौतमः।

जमदग्निर्भरद्वाज इति सप्तर्षयः स्मृताः ॥

(कश्यप, अत्रि, वसिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, भारद्वाज – ये सात ऋषि हैं।)

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